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AAP चुनावों में हो रही लगातार हार से कैसे बाहर निकले

AAP जिसने मोदी के जीत का अश्वमेध रथ दिल्ली में रोका था आज जीत का रास्ता भूल गयी है। 2015 के दिल्ली चुनाव के बाद और पंजाब चुनाव से पहले तक जो समय था उसमें ऐसा लगता था कि बीजेपी और मोदी का जवाब सिर्फ AAP के पास ही है। लेकिन फिर लगातार हारों का ऐसा दौर शुरू हुआ है कि ग्राउंड पे जो वालंटियर है उनका मनोबल सबसे निचले स्तर पर है। इस समय AAP संकट में है पर इस संकट का हल बहोत आसान है। पता नही क्यों लेकिन आम आदमी पार्टी जो हर प्रस्थिति के मुताबिक अपने आप को ढाल लेती थी, तेज़ी से सीखती थी आज कहाँ गलती हो रही है समझ नही पा रही। मेरे जैसे छोटे वालंटियर जो दिल्ली बहोत कम आए है अपने-अपने राज्य में बैठे है, सब कुछ देख समझ रहे है और निराश है। इस लेख में मैं जो समझ पा रहा हूँ वो लिखा है। मोटे तौर पे 2 ही बिन्दुयों पर बात की है जो मेरी समझ में आते है। Politics of Power / शक्ति प्रदर्शन (ताकत) की राजनीति मुझे यह कहने में बिलकुल भी संकोच नही है कि 2017 की आम आदमी पार्टी 2015 की AAP से बहोत अलग है। 2014, 2015 में AAP कमज़ोर थी लेकिन उसको अपनी ताकत पे भरोसा था। लेकिन आज AAP कई राज्यों ...