AAP चुनावों में हो रही लगातार हार से कैसे बाहर निकले
AAP जिसने मोदी के जीत का अश्वमेध रथ दिल्ली में रोका था आज जीत का रास्ता भूल गयी है। 2015 के दिल्ली चुनाव के बाद और पंजाब चुनाव से पहले तक जो समय था उसमें ऐसा लगता था कि बीजेपी और मोदी का जवाब सिर्फ AAP के पास ही है। लेकिन फिर लगातार हारों का ऐसा दौर शुरू हुआ है कि ग्राउंड पे जो वालंटियर है उनका मनोबल सबसे निचले स्तर पर है। इस समय AAP संकट में है पर इस संकट का हल बहोत आसान है। पता नही क्यों लेकिन आम आदमी पार्टी जो हर प्रस्थिति के मुताबिक अपने आप को ढाल लेती थी, तेज़ी से सीखती थी आज कहाँ गलती हो रही है समझ नही पा रही। मेरे जैसे छोटे वालंटियर जो दिल्ली बहोत कम आए है अपने-अपने राज्य में बैठे है, सब कुछ देख समझ रहे है और निराश है। इस लेख में मैं जो समझ पा रहा हूँ वो लिखा है। मोटे तौर पे 2 ही बिन्दुयों पर बात की है जो मेरी समझ में आते है।
Politics of Power / शक्ति प्रदर्शन (ताकत) की राजनीति
मुझे यह कहने में बिलकुल भी संकोच नही है कि 2017 की आम आदमी पार्टी 2015 की AAP से बहोत अलग है। 2014, 2015 में AAP कमज़ोर थी लेकिन उसको अपनी ताकत पे भरोसा था। लेकिन आज AAP कई राज्यों में फ़ैलने के बाद भी अपने आप को रोज़ पीड़ित दिखाती है। LG से पीड़ित, EVM से पीड़ित, CBI से पीड़ित, ED से पीड़ित, मोदी से पीड़ित। पीड़ित को लोग कभी अपना नेता नही चुनते, ताकतवर को चुनते है। सबसे बड़ी संकट की बात इस वक़्त AAP में यही है कि वो इस समय ताकत की मुद्रा की बजाय पीड़ित की मुद्रा में है। राजनीति में संगठन या सरकार की ताकत का प्रदर्शन बहोत जरूरी है लेकिन पता नही क्यों AAP ऐसा न के बराबर करती है बल्कि ज्यादतर बार उलट चलती है। शक्ति प्रदर्शन करना राजनीति में इतना महत्वपूर्ण है कि हर पार्टी की सारी राजनीतिक गतिविधियाँ इसी के इर्द-गिर्द घुमती रहती है। आप लोग इसे VIP कल्चर से जोड़ के मत देखिये। मैं लाल बत्ती वाली गाड़ियों में घुमने की बात नही कर रहा हूँ और न ही जनता पर नेता होने की दौंस जमाने की बात कर रहा हूँ। मैं कुछ उदारण दे के समझाता हूँ।
जब अरविंद केजरीवाल दिल्ली में अच्छे सरकारी स्कूलों का उदघाटन करते है तो वो दिल्ली सरकार का शक्ति प्रदर्शन है जिससे AAP की हवा बनती है। AAP मेसेज देती है कि हमने अच्छा काम किया जो बीजेपी कभी नही कर पाई। जब दिल्ली में odd-even हुआ तो पूरी दिल्ली अरविंद केजरीवाल के कहने के मुताबिक गाड़ियाँ चलाती थी, मोहल्ला क्लिनिक और गवर्नेंस के सारे नमूने AAP और अरविंद को ताकतवर दिखाते है। यह AAP का शक्ति प्रदर्शन है। यही कारन है कि जब AAP का पूरा सोशल मीडिया और केजरीवाल बीजेपी पर अटैक करना छोड़ कर सिर्फ AAP के किये हुए कामों की बात करते है तो कुछ अद्भुत सा ही आनंद होता है। AAP की हवा बनती है। AAP के वालंटियर्स में उतशाह आता है। यह इसलिए होता है कियोकि तब हमें AAP और केजरीवाल एक बहोत ताकतवर नेता के रूप में दिखने लगते है जो अपने दम पर इतने बड़े बदलाव कर रहे है। राजनीति में ताकत का मुज़ाहरा बहोत ज़रूरी है कियोकि लोग ताकत की तरफ खिचते है न के कमजोरी की तरफ। ताकत के दिखावे में मोदी या बीजेपी चैंपियन है। आप बताओ मोदी इतने विदेशी दौरे क्यों करते है? वर्ल्ड लीडर्स के साथ गले क्यों मिलते है? इतने confidence से विदेशों में भाषण क्यों देते है? अपने आप को ताकतवर दिखाने के लिए। सर्जिकल स्ट्राइक किया अपने आप को ताकतवर दिखाने के लिए। पैसे देकर लाखों की भीड़ जुटाकर भाषण दिए जाते है शक्ति प्रदर्शन के लिए।
लेकिन अब मैं बताता हूँ की AAP राजनितिक तौर पे क्या करती है। जब AAP का पूरा सोशल मीडिया खुद यह फैलाता है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री का चीफ सेक्रेटरी उनकी बात नही मान रहा तो इससे केजरीवाल ताकतवर दिखते है या कमज़ोर? जब AAP के नेता 24 घंटे LG काम नही करने दे रहा जपते है तो वो सीधे तौर पे केजरीवाल को जनता के सामने कमज़ोर दिखा रहे है और बीजेपी/ LG को ताकतवर। यह इतनी बड़ी बेवकूफी है जिसका खाम्यज़ा हमने दिल्ली के इलेक्शन में भुगता है। दिल्ली के लोगो ने AAP को 67 सीट दिए है, वो इससे ज्यादा दे नही सकते थे। लेकिन फिर भी अरविंद अपने आप को powerless दिखाएँगे तो परिणाम बहोत बुरे होंगे। मेसेज यह है कि अगर 67 सीट के बाद भी चीफ सेक्रेटरी बात नही मानता तो वो कभी नही मानेगा। इसलिए अगली बार उसे वोट दो जिसकी वो बात सुनता है। केजरीवाल ने 49 दिनों के बाद अस्तिफा देकर गलती की थी और वो 2015 में इस बात के लिए माफ़ी मांगकर सत्ता में आए थे लेकिन आज केजरीवाल रोज़ अपने आप को बिना पॉवर के दिखा रहे है। केजरीवाल दिल्ली की जनता को रोज़ इस्तीफा दे रहे है।
इसीलिए AAP को हमेशा यह ध्यान रखना पड़ेगा कि वो हर वक़्त लोगो को ताकतवर दिखे न के कमज़ोर/ पीड़ित। अभी यह समझो कि नेता और पार्टी के शक्ति प्रदर्शन से क्या-क्या फाएदे होते है और उधाहरण के लिए गुरदासपुर बाई-पोल की बात करूँगा। जब गुरदासपुर में चुनाव की घोषणा हुई तो कांग्रेस, बीजेपी-अकाली और AAP तीनों इलेक्शन मोड में आ गए। कांग्रेस और बीजेपी ने गुरदासपुर में लाखों लोगो की बड़ी-बड़ी रैलियाँ की लेकिन AAP ने 1 भी बड़ी रैली नही की। एक तरफ कांग्रेस और बीजेपी लाखों लोग जुटा रहे थे और दूसरी तरफ भगवंत मान और खैरा जैसे AAP पंजाब के टॉप नेता 30-40 लोगो की नुक्कड़ सभा कर रहे थे। किसी सामान्य अनपढ़ आदमी से पूछ लो कौन जीतेगा? तो वो झट से कहेगा जिसके पीछे 40 लोग है वो इतनी बड़ी लोकसभा सीट कैसे जीतेगा?? चाहे कांग्रेस वाले पैसे देकर लोग बाहर से लाए हो लेकिन इससे कोई फरक नही पड़ता। लोगो के दिमाग में यह बात फिट हो गयी कि कांग्रेस और बीजेपी के पीछे तो लाखो लोग है और AAP race से बाहर है। अगर मैं गुरदासपुर का वोटर हूँ और महनत करके पेट्रोल जलाकर polling booth तक जाऊंगा तो मैं अपनी वोट न जीत सकने वाले उमीदवार को कभी नही दूंगा। मैं सोचूंगा यह 2 उम्दिवार जो जित सकते है इनमें से जो अच्छा लगे उसे वोट दो। तो AAP तो गुरदासपुर की race से पहले ही बाहर हो गयी। लोगो ने अपने दिमाग में ही AAP को नकार दिया, इसी लिए AAP के मेजर-जनरल की जमानत ज़ब्त हुई और बीजेपी के बलात्कारी उमीदवार को 3 लाख वोट मिले। यही कारन है कि इरोम शर्मीला जैसे लोगो को 100 से भी कम वोट मिलते है। शक्ति प्रदर्शन का सबसे बड़ा फ़ायदा यही है कि लोगो में पार्टी या नेता के प्रति confidence आता है कि हाँ यह जीत सकते है। किसी भी पार्टी के लिए अपनी ताकत के दम पर वोटरों के दिमाग में यह ले आना के हाँ यह पार्टी जीत सकती है तब उसका voteshare तगड़ी जम्प लगाता है। यही वो threshold पॉइंट है जिससे किसी भी पार्टी का वोट प्रतिशत 1-2% से जम्प लगाकर double digit में आता है। केजरीवाल और AAP जबतक अपने आप को पीड़ित दिखाने की बजाए हमेशा ताकत की स्थिति में रह कर लोगो में AAP के प्रति विश्वास पैदा नही करते तबतक किसी राज्य में सत्ता तक पहुंचना बहोत दूर की बात है। AAP गुजरात में इस threshold से बोहत नीचे है और अगर गुरदासपुर वाले नतीजे गुजरात में आएँगे तो कोई हैरानगी की बात नही।
जब अरविंद केजरीवाल दिल्ली में अच्छे सरकारी स्कूलों का उदघाटन करते है तो वो दिल्ली सरकार का शक्ति प्रदर्शन है जिससे AAP की हवा बनती है। AAP मेसेज देती है कि हमने अच्छा काम किया जो बीजेपी कभी नही कर पाई। जब दिल्ली में odd-even हुआ तो पूरी दिल्ली अरविंद केजरीवाल के कहने के मुताबिक गाड़ियाँ चलाती थी, मोहल्ला क्लिनिक और गवर्नेंस के सारे नमूने AAP और अरविंद को ताकतवर दिखाते है। यह AAP का शक्ति प्रदर्शन है। यही कारन है कि जब AAP का पूरा सोशल मीडिया और केजरीवाल बीजेपी पर अटैक करना छोड़ कर सिर्फ AAP के किये हुए कामों की बात करते है तो कुछ अद्भुत सा ही आनंद होता है। AAP की हवा बनती है। AAP के वालंटियर्स में उतशाह आता है। यह इसलिए होता है कियोकि तब हमें AAP और केजरीवाल एक बहोत ताकतवर नेता के रूप में दिखने लगते है जो अपने दम पर इतने बड़े बदलाव कर रहे है। राजनीति में ताकत का मुज़ाहरा बहोत ज़रूरी है कियोकि लोग ताकत की तरफ खिचते है न के कमजोरी की तरफ। ताकत के दिखावे में मोदी या बीजेपी चैंपियन है। आप बताओ मोदी इतने विदेशी दौरे क्यों करते है? वर्ल्ड लीडर्स के साथ गले क्यों मिलते है? इतने confidence से विदेशों में भाषण क्यों देते है? अपने आप को ताकतवर दिखाने के लिए। सर्जिकल स्ट्राइक किया अपने आप को ताकतवर दिखाने के लिए। पैसे देकर लाखों की भीड़ जुटाकर भाषण दिए जाते है शक्ति प्रदर्शन के लिए।
लेकिन अब मैं बताता हूँ की AAP राजनितिक तौर पे क्या करती है। जब AAP का पूरा सोशल मीडिया खुद यह फैलाता है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री का चीफ सेक्रेटरी उनकी बात नही मान रहा तो इससे केजरीवाल ताकतवर दिखते है या कमज़ोर? जब AAP के नेता 24 घंटे LG काम नही करने दे रहा जपते है तो वो सीधे तौर पे केजरीवाल को जनता के सामने कमज़ोर दिखा रहे है और बीजेपी/ LG को ताकतवर। यह इतनी बड़ी बेवकूफी है जिसका खाम्यज़ा हमने दिल्ली के इलेक्शन में भुगता है। दिल्ली के लोगो ने AAP को 67 सीट दिए है, वो इससे ज्यादा दे नही सकते थे। लेकिन फिर भी अरविंद अपने आप को powerless दिखाएँगे तो परिणाम बहोत बुरे होंगे। मेसेज यह है कि अगर 67 सीट के बाद भी चीफ सेक्रेटरी बात नही मानता तो वो कभी नही मानेगा। इसलिए अगली बार उसे वोट दो जिसकी वो बात सुनता है। केजरीवाल ने 49 दिनों के बाद अस्तिफा देकर गलती की थी और वो 2015 में इस बात के लिए माफ़ी मांगकर सत्ता में आए थे लेकिन आज केजरीवाल रोज़ अपने आप को बिना पॉवर के दिखा रहे है। केजरीवाल दिल्ली की जनता को रोज़ इस्तीफा दे रहे है।
इसीलिए AAP को हमेशा यह ध्यान रखना पड़ेगा कि वो हर वक़्त लोगो को ताकतवर दिखे न के कमज़ोर/ पीड़ित। अभी यह समझो कि नेता और पार्टी के शक्ति प्रदर्शन से क्या-क्या फाएदे होते है और उधाहरण के लिए गुरदासपुर बाई-पोल की बात करूँगा। जब गुरदासपुर में चुनाव की घोषणा हुई तो कांग्रेस, बीजेपी-अकाली और AAP तीनों इलेक्शन मोड में आ गए। कांग्रेस और बीजेपी ने गुरदासपुर में लाखों लोगो की बड़ी-बड़ी रैलियाँ की लेकिन AAP ने 1 भी बड़ी रैली नही की। एक तरफ कांग्रेस और बीजेपी लाखों लोग जुटा रहे थे और दूसरी तरफ भगवंत मान और खैरा जैसे AAP पंजाब के टॉप नेता 30-40 लोगो की नुक्कड़ सभा कर रहे थे। किसी सामान्य अनपढ़ आदमी से पूछ लो कौन जीतेगा? तो वो झट से कहेगा जिसके पीछे 40 लोग है वो इतनी बड़ी लोकसभा सीट कैसे जीतेगा?? चाहे कांग्रेस वाले पैसे देकर लोग बाहर से लाए हो लेकिन इससे कोई फरक नही पड़ता। लोगो के दिमाग में यह बात फिट हो गयी कि कांग्रेस और बीजेपी के पीछे तो लाखो लोग है और AAP race से बाहर है। अगर मैं गुरदासपुर का वोटर हूँ और महनत करके पेट्रोल जलाकर polling booth तक जाऊंगा तो मैं अपनी वोट न जीत सकने वाले उमीदवार को कभी नही दूंगा। मैं सोचूंगा यह 2 उम्दिवार जो जित सकते है इनमें से जो अच्छा लगे उसे वोट दो। तो AAP तो गुरदासपुर की race से पहले ही बाहर हो गयी। लोगो ने अपने दिमाग में ही AAP को नकार दिया, इसी लिए AAP के मेजर-जनरल की जमानत ज़ब्त हुई और बीजेपी के बलात्कारी उमीदवार को 3 लाख वोट मिले। यही कारन है कि इरोम शर्मीला जैसे लोगो को 100 से भी कम वोट मिलते है। शक्ति प्रदर्शन का सबसे बड़ा फ़ायदा यही है कि लोगो में पार्टी या नेता के प्रति confidence आता है कि हाँ यह जीत सकते है। किसी भी पार्टी के लिए अपनी ताकत के दम पर वोटरों के दिमाग में यह ले आना के हाँ यह पार्टी जीत सकती है तब उसका voteshare तगड़ी जम्प लगाता है। यही वो threshold पॉइंट है जिससे किसी भी पार्टी का वोट प्रतिशत 1-2% से जम्प लगाकर double digit में आता है। केजरीवाल और AAP जबतक अपने आप को पीड़ित दिखाने की बजाए हमेशा ताकत की स्थिति में रह कर लोगो में AAP के प्रति विश्वास पैदा नही करते तबतक किसी राज्य में सत्ता तक पहुंचना बहोत दूर की बात है। AAP गुजरात में इस threshold से बोहत नीचे है और अगर गुरदासपुर वाले नतीजे गुजरात में आएँगे तो कोई हैरानगी की बात नही।
राजनीति की दिशा को कण्ट्रोल करना
2015 के चुनाव में जब AAP 67 सीट जीती थी तो सारी politics की दिशा AAP तय किया करती थी। AAP में यह quality अब जैसे गायब सी हो गयी है। 2015 के दिल्ली चुनाव में अरविंद अपनी विज़न देते थे और बीजेपी-कांग्रेस वाले तिलमिला कर AAP पे अटैक करते थे। AAP फोकस रहती और सिर्फ अपने विज़न और कामों का प्रचार करती। AAP का मेसेज लोगो तक पहुँचता देख बीजेपी-कांग्रेस और ज्यादा अटैक करते, अरविंद फिर बाहर आते और किसी और मुधे पे अपना विज़न देते। बीजेपी-कांग्रेस फिर दुसरे मुधे पर AAP पर अटैक करती। जब चुनाव का दिन आया तो AAP ने तो अपना विज़न और काम लोगो के सामने रख दिए थे लेकिन भाजपा-कांग्रेस ने पुरे चुनाव में सिर्फ विरोध ही किया था। AAP ऐसी जीती कि 67 सीटों की टीस अभी तक भाजपा वाले भूल नही पाए है।
आज अरविंद ऐसा नही करते। अब अरविंद अपना विज़न नही देते। अब वो सिर्फ भाजपा की गलतियां लोगो को बताते है। ऐसा क्यों? पंजाब हम जीतकर हारे है। हमने इतनी भारी कीमत दी है। सारे पंजाब के चुनाव में AAP ने अकालियों को गालियाँ दी, ड्रग लार्ड बताया, उनके scandle निकाले, कैप्टेन के स्विस बैंकों के खाते नंबर जनता को बताए लेकिन एक काम तो AAP करना भूल ही गई। अरविंद ने पंजाब के लोगो को अपना विज़न तो बताया ही नही। वोटरों को पता ही नही चला कि AAP पंजाब के लिए क्या क्या काम करेगी। मैं तो फेसबुक लाइव रोज़ सुनता था, हर पंजाबी ने सुना। कांग्रेस ने AAP के मुकाबले बहोत कम विरोध किया बल्कि AAP का मनिफेस्तो कॉपी करके लोगो को सुनाते रहे। हम इसीलिए हार गए।
इस वक़्त देश या किसी राज्य में ऐसा कोई नेता नही जिसमें अरविंद/ AAP से ज्यादा क़ाबलियत है। अरविंद या AAP के राज्यों के नेता क्यों आज देश/ राज्यों की समस्यों पर अपनी विज़न नही देते?? क्यों गुजरात के चुनाव में हम सिर्फ बीजेपी का विरोध ही किए जा रहे है। हम लोगो की समस्याओं के हल पर क्यों नही बात कर रहे? बीजेपी/ कांग्रेस देश में exist भी करती है भूल जाओ। हमारे सामने देश के लोग है, वो पीड़ित है। वो गहरी समस्याओं से जुंझ रहे है। क्या AAP के पास इन समस्याओं का हल है? अगर है तो वो लोगो को क्यों नही बता रहे?? अगर अरविंद माइक पकड़कर बोलेंगे कि इस समस्या का हल यह है और हम इसे ऐसे हल करेंगे तो देश उन्हें सुनेगा और उनके पीछे चल पड़ेगा। सोचो अगर अरविंद/ अन्ना ने रामलीला मैदान में खड़े होकर देश को भ्रष्टाचार से कैसे मुक्त करे यह विज़न न देकर सिर्फ कांग्रेस/ बीजेपी को गालियाँ दी होती तो क्या इतना बड़ा अन्धोलन खड़ा हो पाता? गालियाँ देने वाले तो बहोत है दिशा देने वाला कोई नही। बीजेपी/ कांग्रेस तुमपे अटैक करेंगे, तुमपे हसेंगे लेकिन तुम्हे उन्हें नही देखना है लोगो की समस्यों को देखना है। बाकी भगवान हमेशा कोशिश वालो का साथ देता है।
(For feedback tweet to @UdtaHathi)
आज अरविंद ऐसा नही करते। अब अरविंद अपना विज़न नही देते। अब वो सिर्फ भाजपा की गलतियां लोगो को बताते है। ऐसा क्यों? पंजाब हम जीतकर हारे है। हमने इतनी भारी कीमत दी है। सारे पंजाब के चुनाव में AAP ने अकालियों को गालियाँ दी, ड्रग लार्ड बताया, उनके scandle निकाले, कैप्टेन के स्विस बैंकों के खाते नंबर जनता को बताए लेकिन एक काम तो AAP करना भूल ही गई। अरविंद ने पंजाब के लोगो को अपना विज़न तो बताया ही नही। वोटरों को पता ही नही चला कि AAP पंजाब के लिए क्या क्या काम करेगी। मैं तो फेसबुक लाइव रोज़ सुनता था, हर पंजाबी ने सुना। कांग्रेस ने AAP के मुकाबले बहोत कम विरोध किया बल्कि AAP का मनिफेस्तो कॉपी करके लोगो को सुनाते रहे। हम इसीलिए हार गए।
इस वक़्त देश या किसी राज्य में ऐसा कोई नेता नही जिसमें अरविंद/ AAP से ज्यादा क़ाबलियत है। अरविंद या AAP के राज्यों के नेता क्यों आज देश/ राज्यों की समस्यों पर अपनी विज़न नही देते?? क्यों गुजरात के चुनाव में हम सिर्फ बीजेपी का विरोध ही किए जा रहे है। हम लोगो की समस्याओं के हल पर क्यों नही बात कर रहे? बीजेपी/ कांग्रेस देश में exist भी करती है भूल जाओ। हमारे सामने देश के लोग है, वो पीड़ित है। वो गहरी समस्याओं से जुंझ रहे है। क्या AAP के पास इन समस्याओं का हल है? अगर है तो वो लोगो को क्यों नही बता रहे?? अगर अरविंद माइक पकड़कर बोलेंगे कि इस समस्या का हल यह है और हम इसे ऐसे हल करेंगे तो देश उन्हें सुनेगा और उनके पीछे चल पड़ेगा। सोचो अगर अरविंद/ अन्ना ने रामलीला मैदान में खड़े होकर देश को भ्रष्टाचार से कैसे मुक्त करे यह विज़न न देकर सिर्फ कांग्रेस/ बीजेपी को गालियाँ दी होती तो क्या इतना बड़ा अन्धोलन खड़ा हो पाता? गालियाँ देने वाले तो बहोत है दिशा देने वाला कोई नही। बीजेपी/ कांग्रेस तुमपे अटैक करेंगे, तुमपे हसेंगे लेकिन तुम्हे उन्हें नही देखना है लोगो की समस्यों को देखना है। बाकी भगवान हमेशा कोशिश वालो का साथ देता है।
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Very good analysis. AAP leaders must read and evolve.
ReplyDeleteWonderful very nicely return and main important thing is direction that you have written which was clearly visible when i went to punjab people use to tell us they will vote for change but never said directly congress. I felt they will vote for aap but actually they voted congress because aap leaders specially bhagwant mann never use to give vision only attack on akali which harmed us a lot i totally agree hum punjab jitkar bhi haare.
ReplyDeletegreat
ReplyDeleteThis is the thing which is missing.
इस बार vvpat से चुनाव होंगे.
चुनाव के नतीजे evm नहीं तय करने वाली.
अगर आम आदमी पार्टी ने
1) दिल्ली के सरकारी स्कूल ,
2) मोहल्ला क्लिनिक ,
3) गरीबों के लिए बनाये गए पक्के घर
4)कच्ची कॉलोनियों में पानी की सप्लाई
5)बिजली के आधे बिल पर जनता की राय
6)पानी माफ़ पर जनता की राय
7) pollution control पर जनता की राय
आदि के विडियो ही चला दिए तो चुनाव की सारी दिशा ही बदल जाएगी.
अब ज़रुरत है तो विडियो दिखने के लिए बड़े प्रोजेक्टोर्स की और एक धाकड़ नेता की.
अगर सिर्फ दो साल में इतने काम करने के बाद भी अपने बारे में सबको न बता पाए तो हमें चुनाव जीतना तो क्या, चुनाव लड़ने का हक भी नहीं है.
We all feel the same. Gujrat election must be fought aggressively or don't fight. I remember AK election r fought to be won..
ReplyDeleteBahut badiya ekdum satik isse acha kuch nahi or ha ek baat sab aapas m milkar kam karo hume jitne se koi nai rok sakta ladne m humara hi nuksaan h
ReplyDeleteAPP must listen this blog seriously.
ReplyDeleteLooks like AK has read your article
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